Thomas L. Friedman’s column: Trump is embarrassing America by speaking Putin’s language | थॉमस एल. फ्रीडमैन का कॉलम: ट्रम्प पुतिन की भाषा बोलकर अमेरिका को शर्मिंदा कर रहे

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8 घंटे पहले
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थॉमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में स्तंभकार
हो सकता है कि आखिरकार ट्रम्प को उनका शांति पुरस्कार मिल ही जाए। दुर्भाग्य से, ये वो नोबेल शांति पुरस्कार नहीं है, जिसकी उन्हें लालसा है। यह नेविल चेम्बरलिन पीस प्राइज है, जो इतिहास किसी आक्रामक तानाशाह के सामने घुटने टेक देने वाले नेता को देता है।
ट्रम्प प्रशासन ने यूक्रेन को पुतिन की मांगों के आगे झुकाने वाला समझौता कर डाला है, और वह भी यूक्रेन या हमारे यूरोपीय सहयोगियों से कोई सलाह-मशविरा किए बिना। उन्होंने यूक्रेन से कह दिया है कि उसे यह योजना माननी ही होगी। अगर यूक्रेन को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह माना जाएगा कि पुतिन को अपने क्रूर और भ्रमित युद्ध में जीत अपने दम पर नहीं, बल्कि अमेरिका के कारण मिली।
अगर हमने इस समझौते को यूक्रेन पर थोप दिया, तो हम सभी के नाम नेविल चेम्बरलिन के साथ बदनामी में दर्ज होंगे। चेम्बरलिन को आज सिर्फ एक कारण से याद किया जाता है। वे ब्रिटेन के वो प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने हिटलर के तुष्टीकरण की नीति अपनाई थी।
उनका मकसद जर्मनी से युद्ध टालने के लिए हिटलर की मांगों के आगे झुकना था। यही 1938 के म्यूनिख समझौते में दिखता है, जिसमें चेम्बरलिन ने जर्मनी को चेकोस्लोवाकिया के हिस्सों को अपने में मिलाने की अनुमति दे दी थी।
चेम्बरलिन ने दावा किया था कि इससे शांति सुनिश्चित हो जाएगी। लेकिन इसके एक साल बाद ही हिटलर ने पोलैंड पर हमला कर दिया, द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ और चेम्बरलिन को इस्तीफा देना पड़ा। वे शर्म के प्रतीक बन गए।
जैसा कि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा है : ट्रम्प शायद सोचते हैं कि अगर यूरोप और यूक्रेन उनकी पेशकश ठुकरा दें, तो वे अंततः यूक्रेन से अपना पल्ला झाड़ सकेंगे। वे साफ तौर पर इस युद्ध से निपटते-निपटते थक गए हैं। लेकिन पुतिन को तुष्ट करने की गलती उनके पूरे कार्यकाल पर बदनुमा दाग की तरह रहेगी।
ये सच है कि अमेरिकी युद्ध को पसंद नहीं करते, लेकिन वे अपमान से और ज्यादा नफरत करते हैं। यूक्रेन में एक खराब समझौता अमेरिका के दुश्मनों को यह संकेत देगा कि वे ताकत, परमाणु धमकी या दबाव बनाकर अमेरिका से जो चाहे हासिल कर सकते हैं।
इस युद्ध की शुरुआत से ही मैं कहता आया हूं कि इसका अंत सिर्फ एक ‘डर्टी डील’ से होगा। यह कितना हास्यास्पद है कि ट्रम्प ने पुतिन के साथ समझौता कर लिया और ऐलान कर दिया कि यूक्रेन को इसे स्वीकार करना होगा, मानो जेलेंस्की को अपनी संसद से मंजूरी नहीं लेनी होगी।
जैसा कि टाइम्स में मेरे सहयोगी डेविड सैंगर ने लिखा है : व्हाइट हाउस द्वारा पेश किए गए रूस-यूक्रेन शांति प्रस्ताव के 28 में से कई बिंदु ऐसे लगते हैं मानो वे क्रेमलिन में लिखे गए हों। वे पुतिन की लगभग सभी अधिकतम मांगों को प्रतिबिंबित करते हैं।
इस प्रस्ताव के तहत यूक्रेन को डोनेत्स्क और लुहांस्क के उन सभी क्षेत्रों को औपचारिक रूप से रूस को देना होगा, जिन्हें रूस ने अपना घोषित कर रखा है। अमेरिका भी इन्हें रूसी क्षेत्र के रूप में मान्यता देगा। रूस दोबारा हमला न करे, यह सुनिश्चित करने के लिए यूक्रेन में किसी भी नाटो बल को तैनात करने की अनुमति नहीं होगी।
यूक्रेनी सेना की अधिकतम सीमा 6 लाख सैनिक तय कर दी जाएगी- यानी मौजूदा संख्या से 25 प्रतिशत कम- और उसे ऐसे लंबी दूरी के हथियार रखने से रोक दिया जाएगा, जो रूस तक पहुंच सकते हों। कीव को अमेरिका की ओर से दोबारा रूसी हमले के खिलाफ अस्पष्ट सुरक्षा गारंटी तो मिलेगी, लेकिन भला कौन उन पर भरोसा करेगा?
ट्रम्प की योजना के तहत रूस द्वारा जब्त की गई 100 अरब डॉलर की संपत्ति को यूक्रेन के पुनर्निर्माण और निवेश के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रयासों में लगाया जाएगा। अमेरिका को उस निवेश से होने वाले लाभ का 50% मिलेगा (जी हां, हम एक बर्बाद देश के पुनर्निर्माण के लिए बने फंड के मुनाफे का आधा हिस्सा मांग रहे हैं)।
तीखी प्रतिक्रिया मिलने के बाद ट्रम्प ने कहा कि यह उनका अंतिम प्रस्ताव नहीं है, लेकिन यह भी जोड़ दिया कि अगर जेलेंस्की इन शर्तों को मानने से इनकार करते हैं, तो वे अपनी मामूली-सी लड़ाई जारी रख सकते हैं। हमेशा की तरह ट्रम्प के रुख में बेतरतीबी है और हमेशा की तरह वे जेलेंस्की से अपेक्षाएं कर रहे हैं, पुतिन से नहीं।
ट्रम्प ने पुतिन के साथ समझौता कर लिया और ऐलान कर दिया कि यूक्रेन को इसे स्वीकार करना होगा, मानो जेलेंस्की को अपनी संसद से मंजूरी नहीं लेनी होगी। शांति प्रस्ताव के कई बिंदु ऐसे लगते हैं मानो वे क्रेमलिन में लिखे गए हों।
(द न्यूयॉर्क टाइम्स से)
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