Friday 29/ 08/ 2025 

भारत-चीन के संबंधों में सुधार और कनेक्टिविटी का वादा – Sadhguru Jaggi Vasudev on India China Relations Connectivity India ntcचर्चित IRS अधिकारी समीर वानखेड़े के प्रमोशन पर मुहर, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से क्या कहा?N. Raghuraman’s column – Distraction can be not only negative but also positive! | एन. रघुरामन का कॉलम: डिस्ट्रैक्शन नकारात्मक ही नहीं, सकारात्मक भी हो सकता है!Mohammed Shami ने अपने IPL फ्यूचर को लेकर दिया ये जवाब!मानसून से मरने वालों की संख्या इस राज्य में हुई 312, बारिश और सड़क दुर्घटनाओं में भी गई कई लोगों की जानVirag Gupta’s column – How will the new law end the menace of online gaming? | विराग गुप्ता का कॉलम: ऑनलाइन गेमिंग का मर्ज नए कानून से कैसे खत्म होगा?भारत-जापान शिखर सम्मलेन में शामिल होने टोक्यो पहुंचे पीएम मोदी, जानें पूरा कार्यक्रमउत्तराखंड में फिर बादल फटा, रुद्रप्रयाग और चमोली में आया सैलाब, भारी तबाही की खबरDerek O’Brien’s column – Parliamentary traditions were hurt in the monsoon session | डेरेक ओ ब्रायन का कॉलम: मानसून सत्र में संसदीय परम्पराओं को ठेस पहुंचीNCERT की किताबों में ISRO पर नया पाठ जोड़ा गया, अब बच्चे पढ़ेंगे भारत के अंतरिक्ष मिशन – ncert books isro missions chandrayaan gaganyaan india rising space power pvpw
देश

Column by Pandit Vijayshankar Mehta- The human body, our children and family are Prasad | पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: मानव शरीर, हमारी संतानें और परिवार प्रसाद ही हैं

  • Hindi News
  • Opinion
  • Column By Pandit Vijayshankar Mehta The Human Body, Our Children And Family Are Prasad

37 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

शरीर, संतानें और गृहस्थी परमात्मा का प्रसाद है और प्रसाद के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। आजकल दुनिया के कुछ हिस्सों में महिलाएं एग फ्रीजिंग करवा रही हैं और शादी के बाद उसको प्रयोग में लेंगी। ये मानव आचरण के साथ सीधी छेड़छाड़ है और इसके परिणाम परिवारों को भुगतने पड़ेंगे। भारत का जो पारिवारिक ढांचा है, उसको 10-15 साल में अलग और अजीब किस्म के धक्के लगने वाले हैं।

श्रीराम के जन्म के पूर्व हुए यज्ञ में जो खीर निकली थी, उसका बंटवारा हुआ था। कैकेयी के हाथ में खीर का पात्र था। उनके मन में विचार आया कि ये बंटवारा ठीक नहीं है। तो मन में उथल-पुथल शुरू हुई। और जिस समय प्रसाद प्राप्त करना था, वो किया नहीं तो एक चील ने उस पर झपट्टा मारा। एक हिस्सा चील के पास चला गया।

यहां समझने वाली बात यह है कि कैकेयी प्रसाद लेते समय अशांत थीं और समय का दुरुपयोग कर रही थीं। इसी तरह हम भी समझें कि शरीर, संतानें और परिवार प्रसाद ही हैं। इनके साथ छेड़छाड़ ना करिए।

खबरें और भी हैं…

Source link

Check Also
Close



DEWATOGEL