Friday 29/ 08/ 2025 

वजन तो घटेगा…लेकिन मसल्स भी गल जाएंगे! वेट लॉस इंजेक्शन का खतरनाक सच, डॉक्टर्स ने दी चेतावनी – weight loss injections danger muscle loss training warning tvismअभी लोकसभा चुनाव हुए तो मोदी-राहुल को कितने नंबर, किस गठबंधन को मिलेंगी कितनी सीटें? सर्वे में हुआ खुलासाभारत-चीन के संबंधों में सुधार और कनेक्टिविटी का वादा – Sadhguru Jaggi Vasudev on India China Relations Connectivity India ntcचर्चित IRS अधिकारी समीर वानखेड़े के प्रमोशन पर मुहर, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से क्या कहा?N. Raghuraman’s column – Distraction can be not only negative but also positive! | एन. रघुरामन का कॉलम: डिस्ट्रैक्शन नकारात्मक ही नहीं, सकारात्मक भी हो सकता है!Mohammed Shami ने अपने IPL फ्यूचर को लेकर दिया ये जवाब!मानसून से मरने वालों की संख्या इस राज्य में हुई 312, बारिश और सड़क दुर्घटनाओं में भी गई कई लोगों की जानVirag Gupta’s column – How will the new law end the menace of online gaming? | विराग गुप्ता का कॉलम: ऑनलाइन गेमिंग का मर्ज नए कानून से कैसे खत्म होगा?भारत-जापान शिखर सम्मलेन में शामिल होने टोक्यो पहुंचे पीएम मोदी, जानें पूरा कार्यक्रमउत्तराखंड में फिर बादल फटा, रुद्रप्रयाग और चमोली में आया सैलाब, भारी तबाही की खबर
देश

N. Raghuraman’s column – Distraction can be not only negative but also positive! | एन. रघुरामन का कॉलम: डिस्ट्रैक्शन नकारात्मक ही नहीं, सकारात्मक भी हो सकता है!

  • Hindi News
  • Opinion
  • N. Raghuraman’s Column Distraction Can Be Not Only Negative But Also Positive!

7 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

वह मेरा सहपाठी था। कक्षा में सबसे लंबा, लेकिन पढ़ाई में सबसे कमजोर। वह हर तरह की शरारत के लिए जाना जाता था, लेकिन बास्केटबॉल का बेहतरीन खिलाड़ी था। टूटी हुई ट्यूब लाइट ठीक करने से लेकर कोई भी भारी काम करने तक, वह सबसे आगे रहता और शिक्षकों की शाबासी पाता था।

चूंकि उन दिनों में कभी भी, किसी के भी जीवन में संकट अचानक से आ जाते थे और इनके समाधान के लिए आउटसोर्सिंग की अवधारणा भी नहीं थी, तो युवा ही सबसे पहले आगे आते थे। और हमेशा मुस्कराने वाला, तगड़ी कद-काठी का यह व्यक्ति स्कूल में अच्छी पढ़ाई करने वालों से भी अधिक ध्यान आकर्षित करता था।

नौवीं कक्षा में बारिश के मौसम के दौरान हमारे नागपुर स्थित सरस्वती विद्यालय के ठीक पीछे बहने वाली नाग नदी उफान पर थी। पानी स्कूल में घुसने लगा। उस लड़के ने कुछ अन्य लोगों के साथ उस दिन कड़ी मशक्कत की, जबकि शेष हम सभी को घर भेज दिया गया।

अगले दिन हमें उसके योगदान के बारे में पता चला, क्योंकि एक सप्ताह तक सभी शिक्षक उसके और कुछ अन्य लोगों के बारे में बातचीत करते रहे। धीरे-धीरे शिक्षक उसे कक्षा में और अधिक काम देने लगे, क्योंकि वैसे भी वह एक डिस्ट्रैक्टेड लड़का था, जिसकी पढ़ाई में कभी रुचि नहीं रही। इसलिए वरिष्ठ शिक्षक उसे स्कूल के हर काम में इस्तेमाल करते थे, लेकिन निजी काम के लिए कभी नहीं। ये अतिरिक्त काम वह खुशी-खुशी करता था, लेकिन इनसे वह थक जाता था।

लेकिन जब दसवीं के परिणाम घोषित हुए तो वह अपने स्कोर को 40% से बढ़ाकर 69% करने में सफल रहा। आप पाठकों की तरह उस वक्त हम भी हैरान थे, लेकिन हमारे शिक्षक नहीं। क्योंकि ये वही विषय शिक्षक थे, जो बारी-बारी उसे अपने घर बुलाते और सुबह स्कूल के लिए किए गए उसके कार्यों के उपहारस्वरूप उसे पढ़ाते थे।

लगभग तीन दशक बाद एक स्कूल री-यूनियन में जब मैंने हमारे एक शिक्षक से इस वाकिये के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि ‘हमने उसकी ऊर्जा को अन्य गतिविधियों की ओर मोड़ा, जिससे वह शारीरिक रूप से थक जाता था और हमने देखा कि उसकी शरारती प्रवृत्ति घट गई।

हम सार्वजनिक रूप से उसकी प्रशंसा करते, ताकि उसमें उत्साह का संचार हो। इसी से वह हमारे करीब आया। इसी लगाव के चलते हमें उसे पढ़ाई की तरफ प्रोत्साहित करने का मौका मिला और उसका किया हुआ हमने प्राइवेट कोचिंग के तौर पर वापस लौटाया। उसके माता-पिता से हमें सहयोग मिला और भाग्य से सब बढ़िया रहा।’

मुझे यह 50 साल पुराना वाकिया तब याद आया, जब मैंने सुना कि कैसे राजस्थान-हरियाणा के मेवात क्षेत्र- जो साइबर क्राइम के मामले में जामताड़ा की तरह कुख्यात रहा है- ने कैसे जल्द पैसा कमाने के लालच से युवाओं का ध्यान हटाया। ध्यान हटाने के लिए खेल उनका औजार बना।

‘खेलो मेवात’- इस साल की शुरुआत में किया गया प्रयोग था, जो इतना सफल रहा कि इसके पहले संस्करण में ही लगभग 10 हजार प्रतिभागी शामिल हुए। मेवात क्षेत्र में पंचायत स्तर की टीमों से शुरू होकर यह धीरे-धीरे ब्लॉक स्तर के मैचों की ओर बढ़ा और आगामी सितंबर में जिला स्तरीय मैचों के तौर पर सम्पन्न होगा।

इस खेल आयोजन ने 264 क्रिकेट टीमें, 150 वॉलीबॉल टीमें, 214 रस्साकशी टीमें, 119 कुश्ती दस्ते और 1 हजार से अधिक ट्रैक और फील्ड एथलीट बनाने में सफलता पाई। युवाओं को खेलों में लगाकर आसानी से पैसा कमाने से उनका ध्यान भंग किया।

मुझे बताया गया कि वास्तव में उन्होंने पैसे के खिलाफ पैसे का इस्तेमाल किया और युवाओं को अपराध से दूर करने के लिए इसमें प्रसिद्धि का अंश भी जोड़ा। हां, विजेता टीमों के लिए 1.5 लाख रुपए और ओवरऑल चैंपियन के लिए 5 लाख रुपए की नकद राशि का पुरस्कार रखने से युवाओं को बड़ी प्रेरणा मिली।

फंडा यह है कि भले ही ‘डिस्ट्रैक्शन’ यानी कहीं मन न लगने की पहचान नकारात्मकता के भाव में हो, लेकिन इसका उपयोग बच्चों को पढ़ाई से असंबंधित गतिविधियों में लगाने के​ लिए आसानी से किया जा सकता है। इससे नकारात्मकता को सकारात्मकता के रंगों में रंगा जा सकता है। यह आइडिया कभी ‘आउटडेटेड’ नहीं होगा।

खबरें और भी हैं…

Source link

Check Also
Close



DEWATOGEL