वजन तो घटेगा…लेकिन मसल्स भी गल जाएंगे! वेट लॉस इंजेक्शन का खतरनाक सच, डॉक्टर्स ने दी चेतावनी – weight loss injections danger muscle loss training warning tvism

मोटापे से बचने के लिए लोग डाइट, एक्सरसाइज और फिजिकल एक्टिविटी पर ध्यान देते थे लेकिन पिछले कुछ सालों से वेट लॉस इंजेक्शन काफी फेमस हो रहे हैं जो वजन कम करने में मदद कर रहे हैं. दुनिया के साथ भारत में भी कुछ कंपनीज आधिकारिक रूप से वेट लॉस इंजेक्शन लॉन्च कर चुके हैं. जानकारी के मुताबिक, अमेरिका में डेढ़ करोड़ से अधिक अमेरिकी GLP-1 दवाओं से अपना वजन कम कर रहे हैं. 2023 में हुई एक रिसर्च के मुताबिक, ये दवाएं ओजेम्पिक, वेगोवी और मौनजारो के नाम से आती हैं जो मूल रूप से टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए बनाई गई थीं. ये दवाइयां कम जोखिम के साथ वजन भी कम करती हैं. लेकिन इन दवा लेने वालों को वेट ट्रेनिंग करनी भी काफी जरूरी होती है नहीं तो सेहत पर काफी बुरा असर होता है.
वेट ट्रेनिंग न करने के नुकसान
अगर आप वेट लॉस करने वाली जीएलपी-1 दवा ले रहे हैं या लेने पर विचार कर रहे हैं तो यह याद रखना ज़रूरी है कि भूख कम करने वाली दवाओं का इस्तेमाल सिर्फ चर्बी कम करने में ही नहीं होता. इन्हें लेने से मसल्स लॉस भी होता है.
आपका मसल्स लॉस कितना होगा यह बात पर्सन टू पर्सन डिपेंड करता है. लेकिन रिसर्च से पता चला है कि लोगों द्वारा इंजेक्शन से कम किए गए वजन का 15 प्रतिशत से 60 प्रतिशत हिस्सा लीन मसल्स मास होता है यानी कि अगर आप 20 किलो वजन कम करते हैं तो उसमें 3.5 किलो से 10 किलो तक जो वजन कम होगा वो मसल्स का होगा.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
रटगर्स न्यू जर्सी मेडिकल स्कूल के क्लिनिकल असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पीटर वेंगर ने कहा, ‘कई मरीज इन दवाओं के सेवन के दौरान आई कमजोरी को तब तक कम आंकते हैं जब तक कि वो कमजोरी उन्हें काम करने में बाधा उत्पन्न नहीं करती. जैसे कि सीढ़ियां चढ़ते समय या कुछ भारी काम करते समय. यदि आप GLP-1 वजन घटाने वाले प्रोग्राम को फॉलो कर रहे हैं तो अपनी हेल्थ और फिजिकल स्ट्रेंथ के लिए वेट ट्रेनिंग करनी जरूरी है. यदि आपके मसल्स मजबूत रहेंगे तो वो हड्डियों को भी मजबूती देंगी और ये आगे चलकर मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए भी जरूरी है.
यदि आप 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं तो मसल्स लॉस से बचने के लिए एक्सरसाइज और वेट ट्रेनिंग और भी जरूरी हो जाती है.
इंडियानापोलिस स्थित इंडियाना यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के डायबिटीज एवं डिसीज सेंटर में डायबिटीक रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. विरल शाह ने कहा, ’65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को पहले से ही सार्कोपेनिया का खतरा होता है. सार्कोपेनिया, उम्र के साथ होने वाले मसल्स लॉस, मसल्स की ताकत और उनके काम करने की क्षमता में कमी को दिखाती है. लेकिन मांसपेशियों का कम होना किसी के लिए भी अच्छा नहीं है, चाहे आपकी उम्र कुछ भी हो.’
‘यहां तक कि जब आपकी उम्र कम होती है तब भी आप इन दवाइयों को लेने के बाद बूढ़े महसूस कर सकते हैं क्योंकि इन दवाओं के कारण आपके मसल्स भी तेजी से कम होते हैं.’
वेंगर और अन्य विशेषज्ञ जीएलपी-1 का उपयोग करते समय वेट ट्रेनिंग करने की सलाह देते हैं.
इस बात का रखें ध्यान
इससे पहले कि आप जिम जाकर कसरत शुरू करें, ध्यान रखें कि GLP-1 लेते समय आपको भूख कम लग सकती है और मतली आ सकती है. खासकर इलाज की शुरुआत में. साथ आपको थकान और चक्कर भी आ सकते हैं. इसलिए आपका वेट ट्रेनिंग प्रोग्राम औसत व्यक्ति की तुलना में कम इंटेंस होना चाहिए और हैवी वेट की ओर धीरे-धीरे बढ़ें ना कि शुरुआत में ही हैवी लिफ्टिंग करने लगें.
डॉ. पीटर वेंगर ने कहा, ‘हम मशीनों की तुलना में स्क्वैट्स और डेड लिफ्ट जैसी एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं क्योंकि ये एक्सरसाइज एक साथ शरीर के कई सारे अंगों को ट्रेन करती हैं. लोगों को हफ़्ते में 3 बार वेट ट्रेनिंग और बाकी तीन दिन एरोबिक एक्सरसाइज करना चाहिए. साथ ही एक दिन रेस्ट करना चाहिए.
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